विक्रम संवत भारतीय कालगणना प्रणाली सभ मे सँ एक अत्यन्त प्राचीन, वैज्ञानिक आ सांस्कृतिक दृष्टि सँ समृद्ध परंपरा छी।

ई मात्र समय गिनबाक एक साधन नहि, बल्कि भारतीय सभ्यता, संस्कृति आ जीवन-पद्धति के मूल आधार रूपेँ स्थापित अछि। भारत आ नेपाल दूनू देश मे ई संवत आइओ धार्मिक अनुष्ठान, पर्व-त्योहार, सामाजिक आयोजन आ कृषि-कार्य मे व्यापक रूप सँ प्रचलित अछि।

मानव सभ्यता के विकास यात्रा मे कालगणना के अत्यन्त महत्वपूर्ण स्थान रहल अछि। समय के सही निर्धारण बिना ने त’ कृषि संभव छल, ने सामाजिक व्यवस्था, आ ने धार्मिक अनुष्ठान। भारतीय परंपरा मे कालगणना केवल गणितीय प्रक्रिया नहि, बल्कि प्रकृति, धर्म आ जीवन के समन्वित रूप रहल अछि। विक्रम संवत एहि समन्वित परंपरा के एक उत्कृष्ट उदाहरण छी। परंपरागत रूप सँ एकर आरंभ 57 ईसा पूर्व मानल जाइत अछि, जकर आधार पर एकर गणना कएल जाइत अछि।

विक्रम संवत के उत्पत्ति के संबंध मे एक प्रसिद्ध जनश्रुति अछि जे राजा विक्रमादित्य शक सभ पर विजय प्राप्त क’ एहि संवत के स्थापना केलनि। मुदा आधुनिक इतिहासकार सभ एहि धारणा पर संदेह प्रकट करैत छथि। प्राचीन अभिलेख सभ मे “मालव संवत” आ “कृत संवत” नाम सँ कालगणना के उल्लेख भेटैत अछि, जकरा बाद के समय मे “विक्रम संवत” कहल जाए लगल। एहि आधार पर ई स्पष्ट होइत अछि जे विक्रम संवत के ऐतिहासिकता दू स्तर पर बुझल जा सकैत अछि—पहिल, कालगणना प्रणाली के प्राचीन अस्तित्व; दोसर, विक्रमादित्य सँ एकर प्रत्यक्ष संबंध के अनिश्चितता।

वैज्ञानिक दृष्टि सँ देखल जाए त’ विक्रम संवत एक चंद्र-सौर (लूनिसोलर) कालगणना प्रणाली छी। एहि मे चंद्रमा के गति अनुसार मास निर्धारित कएल जाइत अछि, जखन कि सूर्य के गति सँ वर्ष आ ऋतु के निर्धारण होइत अछि। प्राचीन भारतीय ग्रंथ सभ—जैना सूर्य सिद्धांत आ विष्णु पुराण—मे एहि प्रकार के वैज्ञानिक गणना प्रणाली के विस्तृत वर्णन भेटैत अछि।

एहि संवत के प्रमुख विशेषता सभ अत्यन्त सूक्ष्म आ वैज्ञानिक अछि। मास चंद्रमा के कलाक्रम पर आधारित रहैत अछि, जकर कारण प्रत्येक मास के स्वरूप प्राकृतिक चक्र सँ जुड़ल रहैत अछि। सूर्य के गति के आधार पर ऋतु परिवर्तन के निर्धारण होइत अछि, जाहि सँ कृषि आ जीवन-शैली पर सीधा प्रभाव पड़ैत अछि। एहि मे “अधिक मास” के व्यवस्था सेहो कएल गेल अछि, जाहि सँ चंद्र आ सौर गणना के बीच संतुलन बनल रहैत अछि। एहि प्रकार ई प्रणाली प्रकृति आ मानव जीवन के बीच अद्भुत तालमेल स्थापित करैत अछि।

विक्रम संवत के नववर्ष चैत्र मास के शुक्ल पक्ष के प्रतिपदा सँ प्रारंभ होइत अछि। धार्मिक मान्यता अनुसार एहि दिन सृष्टिकर्ता ब्रह्मा द्वारा सृष्टि के निर्माण भेल। वैज्ञानिक दृष्टि सँ ई समय वसंत विषुव के आसपास होइत अछि, जतए दिन आ राति लगभग समान रहैत अछि। ई संतुलन, नवजीवन आ ऊर्जा के प्रतीक मानल जाइत अछि, आ एहि कारण एहि दिन नववर्ष के आरंभ अत्यन्त अर्थपूर्ण मानल गेल अछि।

नेपाल मे विक्रम संवत पर आधारित नववर्ष बैशाख मास के प्रथम दिन सँ प्रारंभ होइत अछि, जे सौर गणना पर आधारित अछि। एहि अवसर पर धार्मिक, सांस्कृतिक आ वैज्ञानिक—तीनो पक्ष के अद्भुत समन्वय देखल जा सकैत अछि।

धार्मिक दृष्टि सँ बैशाख संक्रांति सूर्य के मेष राशि मे प्रवेश के सूचक अछि। एहि दिन जूड शीतल के पर्व मनाओल जाइत अछि, जाहि मे जल द्वारा आशीर्वाद देल जाइत अछि। ई जल शुद्धि, शांति आ नव ऊर्जा के प्रतीक मानल जाइत अछि।सांस्कृतिक रूप सँ एहि पर्व पर बासी भात, दही आ अन्य शीतल भोजन के सेवन कएल जाइत अछि। परिवारक सभ सदस्य एकत्र भ’ एक-दोसर के आशीर्वाद दैत छथि। एहि सँ पारिवारिक एकता, सामाजिक सद्भाव आ सामूहिकता के भावना प्रबल होइत अछि।

वैज्ञानिक दृष्टि सँ देखल जाए त’ एहि परंपरा मे गहन व्यावहारिक ज्ञान निहित अछि। गर्मी के प्रारंभ मे ठंढा जल शरीर के तापमान नियंत्रित करैत अछि। किण्वित भोजन, जैना बासी भात, पाचन तंत्र के सुदृढ़ करैत अछि। एहि दिन विश्राम करबाक परंपरा सेहो शरीर के अत्यधिक गर्मी सँ बचाबैत अछि। एहि प्रकार ई परंपरा जलवायु-अनुकूल जीवनशैली के उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करैत अछि।

विक्रम संवत के व्यापकता एहि तथ्य सँ स्पष्ट होइत अछि जे एहि मे इतिहास, खगोल विज्ञान आ संस्कृति—तीनो के समन्वय देखल जा सकैत अछि। ई मात्र समय गिनबाक प्रणाली नहि, बल्कि जीवन के एक संगठित ढाँचा प्रदान करैत अछि, जाहि मे प्रकृति, समाज आ धर्म एक-दोसर सँ गहराई सँ जुड़ल अछि।
अंततः, ई कहल जा सकैत अछि जे विक्रम संवत भारतीय ज्ञान परंपरा के एक अनुपम उपलब्धि छी।

यद्यपि एकर उत्पत्ति आ नामकरण के संबंध मे ऐतिहासिक विवाद अवश्य अछि, मुदा एकर वैज्ञानिकता आ सांस्कृतिक उपयोगिता पूर्ण रूप सँ निर्विवाद अछि। नेपालक नववर्ष आ मिथिला के जूड शीतल परंपरा एहि बात के प्रमाण अछि जे प्राचीन काल सँ मनुष्य प्रकृति के संग संतुलन बना क’ जीवन यापन करबाक प्रयास करैत आबि रहल अछि।

एहि दृष्टि सँ विक्रम संवत केवल कालगणना प्रणाली नहि, बल्कि एक समग्र जीवन-दर्शन छी—जाहि मे समय, प्रकृति आ मानव जीवन के अद्भुत समन्वय निहित अछि।

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